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Adam Zagajewski – Impossible Friendships

Impossible Friendships


 

For example, with someone who no longer is,

who exists only in yellowed letters.

 

Or long walks beside a stream,

whose depths hold hidden

 

porcelain cups—and the talks about philosophy

with a timid student or the postman.

 

A passerby with proud eyes

whom you’ll never know.

 

Friendship with this world, ever more perfect

(if not for the salty smell of blood).

 

The old man sipping coffee

in St.-Lazare, who reminds you of someone.

 

Faces flashing by

in local trains—

 

the happy faces of travelers headed perhaps

for a splendid ball, or a beheading.

 

And friendship with yourself

—since after all you don’t know who you are.

 

 

Poet – Adam Zagajewski

Translator – Clare Cavanagh

असंभव दोस्तियां


 

मसलन, किसी ऐसे से जो अब जीवित नहीं

जो अब सिर्फ़ पुराने पीले पड़ गए ख़तों में रहता है

 

या उस नदी के किनारे लंबी चहलक़दमी

जिसकी गहराइयां अपने भीतर छिपाए हुए हैं

 

चीनी मिट्टी से बने प्याले – या दर्शन के बारे में की गई चर्चाएं

किसी बेहद संकोची छात्र के साथ या डाकिए के साथ.

 

सड़क से गुज़रते उस व्यक्ति के साथ

जिसकी आंखें गरबीली हैं और जिसे तुम कभी जान नहीं पाओगे.

 

दोस्ती इस दुनिया से, जो पहले से कहीं सुंदर, पूर्ण व निर्दोष हो

(कम से कम ख़ून की नमकीन गंध के लिए नहीं).

 

सेंट लाज़ा में बैठ कॉफ़ी पी रहे उस बूढ़े से

जिसे देख तुम्हें किसी की याद आ जाती है.

 

लोकल ट्रेनों में चमकते हुए

चेहरों से-

 

यात्रियों के ख़ुश चेहरे जो शायद किसी शानदार

जश्न के लिए निकले हैं या शायद सिर कटा देने के लिए.

 

और दोस्ती ख़ुद से भी

– क्योंकि आखि़र तुम ख़ुद भी तो नहीं जानते, तुम हो कौन.

 

 

कवि – एडम ज़गायेव्स्की

अनुवादक – गीत चतुर्वेदी