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Bei Dao – The Roses of Time

The Roses of Time 


 

When the gate guard sinks into sleep
You turn back together with the storm
That which ages in the embrace is
The rose of time

 

When the birds’ routes demarcate the sky
You look backward at the sunset
That which appears in the disappearance is
The rose of time

 

When the sword is bent in the water
You tread the flute melody across the bridge
That which cries aloud in the conspiracy is
The rose of time

 

When the pen draws a line of horizon
You’re startled awake by the oriental gong
That which blooms in the reverberation is
The rose of time

 

It is always this moment in the mirror
This moment leads toward the gate of rebirth
And the gate opens toward seas
The roses of time

 

 

Poet – Bei Dao

Translator – Tao Naikan and Simon Patton

समय का गुलाब


 

जब पहरेदार सो जाता है

तुम तूफ़ान के साथ मुड़ जाते हो पीछे

गले लगते हुए बूढ़ा होते रहना

समय का गुलाब है

 

जब चिडिय़ों से बनी सड़क आसमान की परिभाषा गढ़ती है

तुम सूर्यास्त के पीछे झांककर देख लेना चाहते हो

गुमशुदगी के भीतर प्रकट हो जाना

समय का गुलाब है

 

जब चाक़ू पानी में घुसाकर मोड़ दिया गया हो

तुम बांसुरी से निकले गीतों पर चलते हुए पुल पार करते हो

षड्यंत्रों में रोना

समय का गुलाब है

 

जब एक क़लम क्षितिज का रेखाचित्र खींचता है

पूरब से बजने वाले घंटे की आवाज़ से तुम जाग जाते हो

प्रतिध्वनियों में फूल की तरह खिल उठना

समय का गुलाब है

 

आईने में हर वक़्त यह क्षण दिखता है

यह क्षण हमें पुनर्जन्म के द्वार तक ले जाता है

यह द्वार एक समंदर पर खुलता है जो

समय का गुलाब है

 

 

कवि – बेई दाओ

अनुवादक – गीत चतुर्वेदी