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Bei Dow – To Father

To Father


 

In a chilly morning of February
The oak has finally taken a grievous size
Father, before your photograph
The eight-direction wind retains the calmness of round tables

 

I look from the perspective of childhood
And always see you from behind
Shepherding dark clouds and white sheep
Along the road that leads toward monarchy

 

The eloquent wind brings out floods
The logic of urban lanes goes deep in the heart
You call on me to be your son
I follow you to become a father

 

The fate that flows in the palm
Activates sun, moon and stars to circle
Under the lone lamp of men
Everything pairs in dark shades

 

The brothers of clock, hour and minute hands
Fight, frame an acute angle, and unite into one
The thunderbolts of illness roll into nocturnal hospitals
And bang your door open

 

The dawn appears on the stage as does a clown
The flames of morning light change your bedclothes
Where clocks and watches stop
The dart of time flies whistling past

 

Hurry, catch up with that chariot of death
A path taken by robbers in spring
Comes to investigate mountains’ wealth
Streams wind the song’s melancholy

 

Slogans hide in the walls
This world has not much changed:
Women turn back and merge into night
Men walk out from morning

 

 

Poet – Bei Dao

Translator – Tao Naikan and Simon Patton

पिता के लिए


 

फरवरी की एक सर्द सुबह

अंत में लगे सिंदूर के सारे वृक्ष उदासी का आकार हैं

पिता, तुम्हारी तस्वीर के सामने

आठ तहों में लिपटी हवा गोल मेज़ को शांत रखती है

 

बचपन की दिशा से

मैंने हमेशा तुम्हारी पीठ देखी

काले बादलों और भेड़ों के झुंड को तुम हांक कर ले जाते थे

सम्राटों की तरफ़ जाने वाली सड़कों पर चलते हुए

 

बड़बोली हवा अपने साथ बाढ़ ले आती है

गलियारों का तर्क लोगों के दिलों में बहुत गहरे गड़ा हुआ है

मुझे आज्ञा देते-देते तुम बेटे बन गए

तुम्हारा अनुसरण करता-करता मैं पिता बन गया

 

हथेली पर बहती है भाग्य की धारा

सूरज चांद सितारों को घुमाती रहती है

इकलौते एक पुरुष लैम्प के नीचे

हर चीज़ की दो-दो परछाईं बनती है

 

घड़ी की सुइयां दो भाई हैं जिनमें होड़ लगी हुई है

कि वे एक न्यूनकोण बना लें, फिर एक हो जाएं

बीमार तूफ़ान रात के अस्पताल में ढुलक रहा है

तुम्हारा दरवाज़ा खटखटाता हुआ

 

विदूषक की तरह आता है सूर्योदय

लपटें तुम्हारी बिस्तर की चादर बदलती हैं

घड़ी जहां रुकती है

समय का ढक्कन सीटी बजाता निकल जाता है

 

मृत्यु की उस गाड़ी को पकड़ें, चलिए,

बसंत के रास्ते पर

कोई चोर पहाड़ों के बीच ख़ज़ाना खोज निकालता है

कोई नदी चक्कर काटती है किसी गीत की उदासियों के

नारे दीवारों के भीतर छुप जाते हैं

यह दुनिया कोई ख़ास नहीं बदलती :

एक औरत मुड़ती है रात में घुल जाती है

सुबह होने पर एक आदमी बाहर निकलता है

 

 

कवि – बेई दाओ

अनुवादक – गीत चतुर्वेदी