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Shamser Bahadur Singh – To my Time

My Time . . .


 

My time has been slashed off as suspire.

 

A poet is a very big parrot, like I am.

He usually has patrons.

They are countless.

 

There lies a chessboard’s squares

You put me there

High in air, Held in between your thumb and fingers

 

In that moment

Which I consider it as a world of my imagination

in fact is a sharp move

Of a deserted breath.

 

 

Poet – Shamser Bahadur Singh

Translator – Lovely Goswami

मेरे समय को…


 

मेरे समय को एक काश की तरह काट दिया गया है

 

कवि एक बड़ा सा तोता होता है, जैसे कि मैं

जिसे उसके संरक्षक पालते हैं

कई होते हैं वे

 

शतरंज का एक खाना है

जिसमे तुम मुझे उपर उठाकर रखते हो

हवा में कुछ देर अंगूठे और अँगुलियों के बीच

अनिश्चय में थामे हुए

 

जिस समय मैं यह समझता हूँ कि यह

मेरी कल्पनाशीलता का लोक है

मगर जो वास्तव में एक बारीक काट है

रुके हुए साँस की

 

 

कवि – शमशेर बहादुर सिंह